सामाजिक न्याय, समानता और सम्मान समाज की ब्यक्तिगत जरूरत ही नही बल्कि इसका सम्बन्ध देश की सम्प्रभुता, एकता और अखण्डता से भी है। जरूरत है प्रगतिशील शोच वाले ऎसे चेतनावान लोगो की जो इसके तह तक जाने की हिम्मत कर सामाजिक न्याय का मार्ग प्रसस्त करे।
जातीयता की राजनीति ने भारतीय समाज के उन तमाम सैकडो छोटी-छोटी जातिय समूहो को एक बार फिर से हासिये पर ला खडा किया किया है जो कभी अखण्ड भारत शिखर पर सूरज बन चमका करते थे, आओ अपनी जडो को तलाशकर मानवता के नये सन्घर्ष का ऎलान करे… सत्यमेव जयते